जनसंख्या के लिहाज़ से और सामाजिक विविधता के मामले में हमारा भारत देश दुनिया का सबसे बड़ा देश है। यहाँ हर क्षेत्र, हर कस्बा, हर गाँव अपनी अलग पहचान रखता है, लेकिन एक बात जो सबमें समान है — वह है ज़रूरत के समय किसी सहारे की उम्मीद।
जब कोई परिवार किसी संकट से गुज़रता है — जैसे आकस्मिक मृत्यु, गंभीर बीमारी तब उसकी सबसे बड़ी ज़रूरत होती है, समय पर सहयोग।
कई बार एक पिता को अपनी बेटी की शादी के लिए भी आर्थिक सहयोग की आवश्यकता पड़ जाती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए SSST स्वयं सेवा संस्थान ट्रस्ट एक नई सोच और व्यवस्था के रूप में सामने आया है। यह ट्रस्ट अब पूरे भारत देश प्रदेश में अपने उद्देश्य और व्यवस्था के साथ तेज़ी से फैल रही है
PSCT की कार्यप्रणाली आज की डिजिटल दुनिया के अनुरूप है। किसी भी नागरिक को संस्था से जुड़ने के लिए न किसी दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते हैं, न कोई लंबी प्रक्रिया होती है। रजिस्ट्रेशन सिर्फ कुछ मिनट में publicselfcareteam.com पर हो सकता है।
सभी alerts और जानकारी WhatsApp, Telegram और Facebook जैसे माध्यमों से भेजी जाती हैं। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश के छोटे गाँवों से लेकर दूर-दराज़ इलाकों तक — लोग PSCT से जुड़ रहे हैं। संस्था ना तो किसी धर्म, जाति या वर्ग का भेद करती है और ना ही किसी स्थान का — यहाँ जुड़ने वाला हर व्यक्ति PSCT परिवार का हिस्सा बन जाता है।
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